1.कृत्या भगवान शिव की जटा से उत्पन्न होने वाली शक्ति का नाम है हर व्यक्ति के अंदर कृत्या शक्ति मौजूद होती है जिसको मंत्र साधना द्वारा जागृत किया जाता है यह शक्ति भीतर के कृत्या और काली तत्व को जागृत करती है
2.दीक्षा के पहले दूसरे चरण में ही व्यक्ति स्वयं और दूसरे को रोग मुक्त करने की क्षमता प्राप्त करता है तथा असाध्य रोगों का भी स्वतः इलाज होने लगता है
3.साधक जल पर कृत्या मंत्र पढ़कर रोगी को अगर दे तो उससे रोगी धीरे-धीरे रोग मुक्त होने लगता है आगे के स्तर पर कृत्या मृत्यु के मुंह से भी किसी को बचाकर लेकर वापस आ सकती है जैसे कि आईसीयू से
4.कृत्या रेखी का हाथ पर आवाहन कर दूर बैठे और पास बैठे व्यक्ति को हील किया जा सकता है।
5.बदन दर्द, सर दर्द एवं चोटों को कृत्या की शक्ति से दूर किया जा सकता है। किसी भी विकट परिस्थिति में फंसने पर कृत्या मंत्र के जाप से परिस्थिति से निकलने का मार्ग तुरंत बनने लगता है।
6.कृत्या के निरंतर जप से भाग्य और हाथ की रेखाएं बदलने लगती हैं। कृत्या के जप से साधक के शरीर में अग्नि तत्व अत्यंत पुष्ट होता है एवं उसका कॉन्फिडेंस बढ़ता है और साधक डिप्रेशन और अन्य बीमारियों से बाहर आता है।